डॉलर दुनिया की सबसे मज़बूत मुद्रा क्यों मानी जाती है?


दुनिया का 85% व्यापार अमेरिकी डॉलर की मदद से होता है. दुनिया भर के 39% क़र्ज़ अमेरिकी डॉलर में दिए जाते हैं और कुल डॉलर की संख्या के 65% का इस्तेमाल अमरीका के बाहर होता है. इसलिए विदेशी बैंकों और देशों को अंतरराष्ट्रीय व्यापार में डॉलर की ज़रूरत होती है. आइये इस लेख के माध्यम से जानते हैं कि आखिर डॉलर को विश्व में सबसे मजबूत मुद्रा के रूप में क्यों जाना जाता है?

 अब हालात तो ऐसे हो गए हैं कि यदि कोई डॉलर का नाम लेता है तो लोगों के दिमाग में सिर्फ अमेरिकी डॉलर ही आता है जबकि विश्व के कई देशों की करेंसी का नाम भी 'डॉलर' है. अर्थात अमेरिकी डॉलर ही “वैश्विक डॉलर” का पर्यायवाची बन गया है.

जानें दुनिया के इन देशों में प्रति व्यक्ति कितना कर्ज है?

डॉलर की मजबूती का इतिहास:

न्यू हैम्पशर के ब्रेटन वुड्स में दुनिया के विकसित देश मिले और उन्होंने अमरीकी डॉलर के मुक़ाबले सभी मुद्राओं की विनिमय दर को तय किया. उस समय अमरीका के पास दुनिया का सबसे अधिक सोने का भंडार था. इस समझौते ने दूसरे देशों को भी सोने की जगह अपनी मुद्रा का डॉलर को समर्थन करने की अनुमति दी.


(ब्रेटन वुड्स कांफ्रेंस)

सन 1970 की शुरुआत में कई देशों ने मुद्रास्फीति से लड़ने के लिए डॉलर के बदले सोने की मांग शुरू कर दी थी. ये देश अमेरिका को डॉलर देते और बदले में सोना ले लेते थे. ऐसा होने पर अमेरिका का स्वर्ण भंडार खत्म होने लगा. उस समय के अमेरिकी राष्ट्रपति निक्सन ने अपने सभी भंडारों को समाप्त करने की अनुमति देने के बजाय डॉलर को सोने से अलग कर दिया और इस प्रकार डॉलर और सोने के बीच विनिमय दर का करार खत्म हो गया और मुद्राओं का विनिमय मूल्य; मांग और पूर्ती के आधार पर होने लगा.

डॉलर सबसे मजबूत मुद्रा होने के निम्न कारण हैं

1. इंटरनेशनल स्टैंडर्ड ऑर्गेनाइज़ेशन लिस्ट के अनुसार दुनिया भर में कुल 185 मुद्राएँ हैं. हालांकि, इनमें से ज़्यादातर मुद्राओं का इस्तेमाल अपने देश के भीतर ही होता है. कोई भी मुद्रा दुनिया भर में किस हद तक प्रचलित है यह उस देश की अर्थव्यवस्था और ताक़त पर निर्भर करता है. ज़ाहिर है डॉलर की मज़बूती और उसकी स्वीकार्यता अमरीकी अर्थव्यवस्था की ताक़त को दर्शाती है.

2. दुनिया का 85% व्यापार अमेरिकी डॉलर की मदद से होता है. दुनिया भर के 39% क़र्ज़ अमेरिकी डॉलर में दिए जाते हैं और कुल डॉलर की संख्या के 65% का इस्तेमाल अमरीका के बाहर होता है. इसलिए विदेशी बैंकों और देशों को अंतरराष्ट्रीय व्यापार में डॉलर की ज़रूरत होती है.

3. विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में देशों के कोटे में भी सदस्य देशों को कुछ हिस्सा अमेरिकी डॉलर के रूप में जमा करना पड़ता है.

4. दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों में जो विदेशी मुद्रा भंडार होता है उसमें 64% अमरीकी डॉलर होते हैं.

5. यदि दो नॉन अमेरिकी देश भी एक दूसरे के साथ व्यापार करते हैं तो भुगतान के रूप में वे अमेरिकी डॉलर लेना पसंद करते हैं क्योंकि उन्हें पता है कि यदि उनके हाथ में डॉलर है तो वे किसी भी अन्य देश से अपनी जरूरत का सामान आयात कर लेंगे.

6. अमेरिकी डॉलर की विनिमय दर में बहुत अधिक उतार-चढ़ाव नहीं होता है इसलिए देश इस मुद्रा को तुरंत स्वीकार कर लेते हैं.

7. अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है जिसके कारण यह बहुत से गरीब देशों को अमरीकी डॉलर में ऋण देता है और ऋण बसूलता भी उसी मुद्रा में हैं जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की मांग हमेशा रहती है.
डॉलर के बाद दुनिया में दूसरी ताक़तवर मुद्रा यूरो है जो दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों के विदेशी मुद्रा भंडार में 20% है. यूरो को भी पूरे विश्व में आसानी से भुगतान के साधन के रूप में स्वीकार किया जाता है. दुनिया के कई इलाक़ों में यूरो का प्रभुत्व भी है. यूरो इसलिए भी मज़बूत है क्योंकि यूरोपीय यूनियन दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है. कुछ अर्थशास्त्री मानते हैं कि निकट भविष्य में यूरो, डॉलर की जगह ले सकता है.

डॉलर को चीनी और रूसी चुनौती:

मार्च 2009 में चीन और रूस ने एक नई वैश्विक मुद्रा की मांग की. वे चाहते हैं कि दुनिया के लिए एक रिज़र्व मुद्रा बनाई जाए 'जो किसी इकलौते देश से अलग हो और लंबे समय तक स्थिर रहने में सक्षम हो.
इसी कारण चीन चाहता है कि उसकी मुद्रा “युआन” वैश्विक विदेशी मुद्रा बाज़ार में व्यापार के लिए व्यापक तरीक़े से इस्तेमाल हो. अर्थात चीन, युआन को अमेरिकी डॉलर की वैश्विक मुद्रा के रूप में इस्तेमाल होते देखना चाहता है. ज्ञातव्य है कि चीन की मुद्रा युआन को IMF की SDR बास्केट में 1 अक्टूबर 2016 को शामिल किया गया था.

यूरोपियन यूनियन की एक रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2016 में विश्व के कुल निर्यात में अमेरिका का हिस्सा 14% और आयात में अमेरिकी हिस्सा 18% था. तो इन आंकड़ों के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिका का विश्व व्यापार में महत्व और डॉलर की अंतरराष्ट्रीय बाजार में वैश्विक मुद्रा के रूप में सर्वमान्य पहचान है.

नाडा ने जेवलिन थ्रो खिलाड़ी अमित दहिया पर लगाया चार साल का बैन


राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (नाडा) के अनुशासनात्मक पैनल ने 17 फरवरी 2020 को एतिहासिक फैसला सुनाते हुए जेवलिन थ्रो खिलाड़ी अमित दहिया पर चार साल का बैन लगा दिया है. अमित दहिया ने पिछले साल राष्ट्रीय भाला फेंक ओपन चैंपियनशिप के दौरान डोप नमूने के लिए अपनी जगह किसी और को भेज दिया था.

हरियाणा के सोनीपत में 16 अप्रैल 2019 को हुई राष्ट्रीय भाला फेंक ओपन चैंपियनशिप प्रतियोगिता में अमित दहिया 68.21 मीटर के अपने सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ तीसरे स्थान पर रहे थे. नाडा के अधिकारियों ने इसके बाद अमित दहिया को डोप नमूने देने को कहा था लेकिन अपनी जगह उन्होंने नूमना देने के लिए किसी और को भेज दिया.

नाडा ने अमित दहिया पर प्रतिबंध क्यों लगाया?

राष्ट्रीय भाला फेंक ओपन चैंपियनशिप प्रतियोगिता में अमित दहिया अपने सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ तीसरे स्थान पर रहे थे. नाडा के अधिकारियों ने इसके बाद अमित दहिया को डोप नमूने देने को कहा था. सत्यापन प्रक्रिया के दौरान नाडा के डोप नमूने एकत्रित करने वाले अधिकारियों को पता चला कि मूत्र के नमूने देने के लिए आया व्यक्ति कांस्य पदक विजेता नहीं है. वह व्यक्ति इस योजना की विफलता के बारे में जानकार उस कमरे से भाग गया जहां नमूने एकत्रित किए जा रहे थे.
अमित दहिया को 16 जुलाई 2019 को अस्थाई तौर पर निलंबित किया गया था. नाडा ने अमित दहिया के मामले को 09 जनवरी 2020 को एडीडीपी (अनुशासनात्मक पैनल) के पास भेज दिया. एडीडीपी ने अब दाहिया को अस्थाई निलंबन की तारीख से चार साल तक निलंबित करने का फैसला सुनाया है.

नाडा ने कहा कि राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी ने भाला फेंक के खिलाड़ी अमित दहिया को सोनीपत के साइ केंद्र में दूसरी राष्ट्रीय भाला फेंक ओपन चैंपियनशिप 2019 के दौरान जानबूझकर नमूना देने से बचने तथा डोपिंग रोधी अधिकारियों के साथ धोखाधड़ी के प्रयास हेतु सजा सुनाई है.


नाडा युवा कार्य और खेल मंत्रालय के अंतर्गत स्वायत्त ईकाई है, जो खेलों में डोपिंग की जांच करती है. सरकार नाडा के काम में दखल नहीं देती और डोपिंग से जुड़े मामलों में पूरी पारदर्शिता तथा निष्पक्षता बरतती है. नाडा, वाडा के तहत काम करती है. वाडा का काम डोपिंग को चेक करना है. इसी मामलों में अंतिम फैसला वाडा ही करती है. खिलाड़ी को यहां पर अपनी बात रखने का मौका मिलता है.

अटल भुजल योजना: विश्व बैंक भूजल प्रबंधन हेतु देगा 45 करोड़ डॉलर का ऋण


विश्व बैंक और भारत सरकार ने 17 फरवरी 2020 को अटल भूजल योजना हेतु 450 मिलियन डॉलर के ऋण समझौते पर हस्ताक्षर किये. इस समझौते का मुख्‍य उद्देश्‍य देश में भूजल के घटते स्‍तर को रोकना और भूजल से जुड़े संस्‍थानों को मजबूत बनाना है.

अटल भूजल योजना (एबीएचवाई) का मुख्य उद्देश्य भागीदारी भूजल प्रबंधन से जुड़े संस्थागत ढांचे को मजबूत करना है. इसका उद्देश्य स्थायी भूजल संसाधन प्रबंधन के लिए सामुदायिक स्तर पर लोगों के व्यवहार में परिवर्तन को प्रोत्साहित करना है.

समझौते से संबंधित मुख्य तथ्य

इस कार्यक्रम से जलभृतों का पुनर्भरण बढ़ेगा, जल संरक्षण से जुड़े उपायों की शुरुआत होगी, जल संचयन, जल प्रबंधन एवं फसल अनुरूपता से संबंधित कार्यकलापों को बढ़ावा मिलेगा, सतत भूजल प्रबंधन के लिए संस्‍थागत संरचना का सृजन होगा और भूजल के निरंतर प्रबंधन हेतु समुदायों तथा संबंधित हितधारकों को समर्थ बनाया जाएगा.
अटल भुजल योजना (एबीएचवाई) को राष्ट्रीय भूजल प्रबंधन सुधार कार्यक्रम के रूप में भी जाना जाता है. यह योजना महाराष्ट्र, हरियाणा, गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक में लागू की जाएगी. इन राज्‍यों में प्रायद्विपीय भारत के कठोर चट्टान वाले जलभृत तथा सिंधु-गंगा के मैदानी इलाके के कछारी जलभृत दोनों ही मौजूद हैं.

भारत सरकार ने अपनी विशिष्ट विशेषताओं और विशिष्ट मानदंडों के कारण इन राज्यों का चयन किया है. इस योजना में भूजल का दोहन एवं क्षरण, सुस्‍थापित वैधानिक एवं नियामकीय साधन, संस्‍थागत तैयारियां और भूजल के प्रबंधन से संबंधित पहलों को लागू करने से जुड़े अनुभव शामिल हैं.


अटल भुजल योजना का उद्देश्य
अटल भूजल योजना का उद्देश्य सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से देश के प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में भूजल प्रबंधन में सुधार करना है. साथ ही किसानों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से भी ये योजना केंद्र सरकार की ओर से लाई गई है. इस योजना का मुख्य उद्देश्य देश के उन इलाकों में भूजल के स्तर को ऊपर उठाने का है जिन इलाकों में भूजल का स्तर काफी नीचे चला गया है. इस योजना के तहत किसानों की आय दोगुनी करने में भी सहायता मिलेगी.

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को जल्द ही कैट के दायरे में लाया जाएगा: जितेन्द्र सिंह


प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) में राज्‍य मंत्री जितेन्‍द्र सिंह ने हाल ही में घोषणा कि केन्‍द्र शासित प्रदेश जम्‍मू-कश्‍मीर और लद्दाख को जल्‍दी ही केन्‍द्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) के दायरे में लाया जाएगा. जितेन्‍द्र सिंह दिल्ली में कैट की अखिल भारतीय वार्षिक सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे. जितेंद्र सिंह कैट के नोडल विभाग के प्रभारी भी हैं.

जितेंद्र सिंह ने कहा कि कैट के पास जम्मू और कश्मीर क्षेत्र से संबंधित मामलों और मुद्दों को संभालने का अधिकार क्षेत्र होगा. उन्होंने कहा कि अधिकरण केन्‍द्रशासित प्रदेशों की सेवाओं से संबंधित विवादों और अन्‍य मुद्दों पर सुनवाई करेगा. अभी तक जम्‍मू-कश्‍मीर में कैट का दायरा केवल केन्‍द्रीय सेवाओं से जुड़े मुद्दों तक सीमित था.

जम्मू-कश्मीर में कैट की बेंच

प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) में राज्‍य मंत्री जितेन्‍द्र सिंह ने बताया कि जम्मू और कश्मीर में कैट की एक विशेष पीठ तैयार की जाएगी. इसके लिए सरकार जल्द ही अपने सदस्यों की नियुक्ति करने जा रही है. चंडीगढ़ सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल की बेंच जम्मू और कश्मीर में सेवा विवादों और अन्य मामलों का निपटारा करेगी जब तक कि जम्मू-कश्मीर बेंच का गठन नहीं हो जाता. राज्‍य मंत्री जितेन्‍द्र सिंह ने कहा कि आने वाले समय में जम्मू-कश्मीर में कैट की विशेष पीठ गठित की जाएगी.
कैट में 66 सदस्य

जितेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल के सदस्यों की नियुक्ति को लेकर कार्रवाई कर रहा है. कैट के अध्यक्ष द्वारा भेजी गई जरूरतों के आधार पर खाली पदों को भरने की दिशा में कार्रवाई जारी है. राज्‍य मंत्री जितेन्‍द्र सिंह ने बताया कि कैट के सदस्यों की संख्या 66 होनी चाहिए. इस समय कई पद खाली होने के कारण फिलहाल सदस्यों की संख्या 39 है. उन्होंने कहा कि सरकार इन खाली पदों को भरने हेतु गंभीरता से काम कर रही है.

केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण की प्रमुख बेंच दिल्ली में है. कैट में एक अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और अन्य सदस्य शामिल हैं. राष्ट्रपति द्वारा इनकी नियुक्ति की जाती है. न्यायिक एवं प्रशासनिक क्षेत्रों से कैट के सदस्यों की नियुक्ति होती है. सेवा की अवधि 6 वर्ष या अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के लिए 65 वर्ष और सदस्यों के लिए 62 वर्ष जो भी पहले हो, तक होती है. अध्यक्ष, उपाध्यक्ष या कैट का कोई भी अन्य सदस्य अपने कार्यकाल के बीच में ही अपना इस्तीफा राष्ट्रपति को भेज सकता है.


कैट का कार्यप्रणाली

कैट सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 की संहिता में निर्धारित प्रक्रिया हेतु बाध्य नहीं है, किन्तु प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों द्वारा निर्देशित है. एक अधिकरण के पास उसी प्रकार की शक्तियां होती हैं जो सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 की संहिता के अंतर्गत एक सिविल कोर्ट के पास होती हैं. कोई व्यक्ति अधिकरण में आवेदन कानूनी सहायता के माध्यम से या फिर खुद हाजिर होकर कर सकता है.

पृष्ठभूमि

केंद्र सरकार ने 05 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद-370 को निरस्त कर दिया था. केंद्र सरकार ने राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विभाजित करने का फैसला किया था.

सेना में स्थायी कमीशन क्या होता है, जानिए इसके बारे में सब कुछ


सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में भारतीय सेना में महिलाओं के स्थायी कमीशन पर एक बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने 17 फरवरी 2020 को सेना में महिलाओं के स्थायी कमीशन पर सहमति दे दी है और साथ ही कमांड पोस्‍ट हेतु भी महिलाओं को योग्‍य बताया है.

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में महिलाओं के स्थायी आयोग के केंद्र सरकार के विरोध को खारिज कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार युद्ध क्षेत्र को छोड़कर बाकी सभी क्षेत्रों में महिला अधिकारियों को स्थायी कमान देने हेतु बाध्य है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 72वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सेना में काम रही महिलाओं को तोहफा देते हुए स्थाई कमीशन की घोषणा की थी. इसके माध्यम से महिलाएं भी पुरुषों की तरह ही देश के लिए सेवा कर सकेंगी.

शॉर्ट सर्विस कमीशन क्या है?
भारतीय सेना में महिला अधिकारियों को शॉर्ट सर्विस कमीशन (एसएससी) के माध्यम से भर्ती की जाती है. वे इसके बाद 14 साल तक सेना में नौकरी कर सकती है. उन्हें इस अवधि के बाद रिटायर कर दिया जाता है. हालांकि उन्हें बीस साल तक नौकरी न कर पाने के वजह से रिटायरमेंट के बाद पेंशन भी नहीं दी जाती है.
भारतीय सेना में शार्ट सर्विस कमीशन के नियम कानून समय-समय पर बदलते रहे. पहले इसके तहत भर्ती महिलाएं मात्र दस साल तक ही नौकरी कर पाती थीं. बाद में सातवें वेतन आयोग में नौकरी की अवधि को बढ़ाकर चौदह साल कर दिया गया था.

क्यों शार्ट सर्विस कमीशन शुरू किया गया?

शार्ट सर्विस कमीशन शुरू करने का मुख्य उद्देश्य अधिकारियों की कमी से जूझ रही सेना की सहायता करना था. इसके तहत सेना में बीच के स्तर पर अधिकारियों की नियुक्ति की जाती है.

शार्ट सर्विस कमीशन से नुकसान
महिला अधिकारियों को सेना में शार्ट सर्विस कमीशन के द्वारा चौदह साल की नौकरी करने के बाद सबसे बड़ी समस्या रोजगार मिलने की होती है. इन महिला अधिकारियों को पेंशन भी नहीं मिलती है जिससे इनके सामने आजीविका का बहुत बड़ा संकट खड़ा हो जाता है. इसके अतिरिक्त भी कई ऐसी सुविधाएं हैं जो इन्हें नहीं मिलती है.
इस विभाग में महिलाओं को मिलेगा स्थाई कमीशन
महिला अधिकारियों को न्यायाधीश एडवोकेट जनरल, आर्मी एविएशन, आर्मी एयर डिफेंस, इलेक्ट्रॉनिक्स और मैकेनिकल इंजीनियर, सेना शिक्षा कोर, सिग्नल, इंजीनियर, आर्मी सर्विस कॉर्प्स, आर्मी ऑर्डिनेंस कॉर्प्स तथा इंटेलिजेंस कोर में स्थायी कमीशन दिया जायेगा.

स्थायी कमीशन दिये जाने का अर्थ यह है कि महिला सैन्य अधिकारी अब सेवा-निवृत्ति (रिटायरमेंट) की उम्र तक सेना में काम कर सकती हैं. यदि वे चाहें तो पहले भी नौकरी से इस्तीफा (त्यागपत्र) दे सकती हैं. अब तक शार्ट सर्विस कमीशन के अंतर्गत सेना में जॉब कर रही महिला अधिकारियों को अब स्थायी कमीशन चुनने का भी विकल्प दिया जायेगा. अब महिला अधिकारी स्थायी कमीशन के बाद पेंशन की भी हकदार हो जाएंगी.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सेना में सभी सेवारत महिलाओं को दस विभाग में स्थाई कमीशन मिले. चौदह साल तक काम कर चुकी सभी महिलाएं बीस साल तक काम कर सकती हैं. उन्हें रिटायर होने के बाद पेंशन भी दी जाएगी. इसके साथ सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अनुच्छेद 15 के अंतर्गत लिंग के आधार पर भेदभाव नहीं हो सकता है.

दिल्ली हाईकोर्ट ने वर्ष 2010 में महिला अफसरों को स्थाई कमीशन देने की अनुमति दे दी थी. सुप्रीम कोर्ट ने 02 सितंबर 2011 को ही साफ कर दिया था कि हाईकोर्ट के फैसले पर रोक नहीं रहेगी. केंद्र सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले के नौ साल बाद फरवरी 2019 में सेना के दस विभागों में महिला अफसरों को स्थाई कमीशन देने की नीति बनाई, लेकिन साथ ही यह कह दिया कि मार्च 2019 के बाद से सर्विस में आने वाली महिला अफसरों को ही इसका लाभ मिलेगा.

World Cancer Day: विश्व कैंसर दिवस क्या है और इसे क्यों मनाया जाता है?

World Cancer Day: विश्व कैंसर दिवस क्या है और इसे क्यों मनाया जाता है?

World Cancer Day 2020: विश्व कैंसर दिवस (World Cancer Day) प्रत्येक साल 4 फ़रवरी को मनाया जाता है. विश्व कैंसर दिवस एक वैश्विक कार्यक्रम है. यह कार्यक्रम विश्व के लोगों को कैंसर के विरुद्ध लड़ाई लड़ने में एकजुट करने हेतु प्रतिवर्ष मनाया जाता है.
विश्व कैंसर दिवस पर दुनिया भर में इस जानलेवा बीमारी को लेकर तरह-तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं. बॉलीवुड की कई हस्तियां हैं, जिन्होंने कैंसर से जंग लड़ी हैं और जीती भी है. इनमें बॉलीवुड अभिनेत्री सोनाली बेंद्रे, मनीषा कोइराला और लीसा रे के नाम प्रमुखता से लिए जाते हैं.

उद्देश्य: इस दिवस को मनाने का उद्देश्य कैंसर के बारे में जागरूकता उत्पन्न करना और रोग का जल्दी पता लगाने की जरूरत तथा कैंसर के उपचार पर ध्यान केंद्रित करना है. इसका मुख्य उद्देश्य विश्व में प्रत्येक वर्ष लाखों लोगों को कैंसर के कारण होने वाली मृत्यु से बचाना भी है.

विश्व कैंसर दिवस 2020 का थीम

विश्व कैंसर दिवस 2020 का थीम- "मैं हूं और मैं रहूंगा" (I am and I will) है. यह विषय कैंसर से लड़ने के लिए हर व्यक्ति के मूल्य पर प्रकाश डालता है. थीम यह भी स्वीकार करता है कि हर किसी में क्षमता है कि वे कैंसर से लड़ सकता है.

विश्व कैंसर दिवस का इतिहास

विश्व कैंसर दिवस की स्थापना अंतरराष्ट्रीय कैंसर नियंत्रण संघ (यूआईसीसी) द्वारा की गई थी. यह एक अग्रणीय वैश्विक एनजीओ है. इसका प्राथमिक लक्ष्य साल 2020 तक कैंसर से होने वाली मौतों को कम करना है. अंतर्राष्ट्रीय कैंसर नियंत्रण संघ (यूआईसीसी) की स्थापना साल 1933 में हुई थी. इस दिवस पर विभिन्न सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्थाओं द्वारा कैंसर से बचाव के विभिन्न अभियान चलाये जाते है.

कैंसर क्या है?

शरीर में कोशिकाओं के समूह की अनियंत्रित वृद्धि कैंसर है. ये कोशिकाएं टिश्यू को प्रभावित करती हैं. इससे कैंसर शरीर के अन्य हिस्सों में फैल जाता है. कैंसर किसी भी उम्र में हो सकता है. लेकिन यदि कैंसर का सही समय पर पता ना लगाया गया और उसका सही समय पर उपचार नहीं हुआ तो इससे मौत का जोखिम भी बढ़ सकता है.

कैंसर के सामान्य लक्षण:
कैंसर का सामान्य लक्षण वजन में कमी, बुखार, भूख में कमी, हड्डियों में दर्द, खांसी या मुंह से खून आना इत्यादि हैं.

कैंसर से बचने के उपाय:
कैंसर से बचने हेतु तंबाकू उत्पादों का सेवन बिलकुल न करें. कैंसर का ख़तरा बढ़ाने वाले संक्रमणों से बचकर रहें. चोट आदि होने पर उसका सही उपचार करें तथा अपनी दिनचर्या को स्वस्थ बनाए. विश्व कैंसर दिवस पर लोगों को इस बीमारी के प्रति जागरुक किया जाता है. उन्हें इस बीमारी के लक्षण, कारण तथा इलाज के बारे में जानकारी दी जाती है.
कैंसर के उपचार के दौरान सरकारी सहायता
कैंसर के उपचार के दौरान मरीज कुछ आर्थिक भार कम करने हेतु आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष, राष्ट्रीय आरोग्य निधि, स्वास्थ्य मंत्री विवेकाधीन अनुदान, केंद्रीय सरकार स्वास्थ्य योजना (सीजीएचएस) जैसी योजनाओं का फायदा ले सकते हैं.

BAFTA Awards 2020: जॉकिन फोनिक्स बने बेस्ट एक्टर, देखें विजेताओं की पूरी सूची

लंदन के रॉयल अल्बर्ट हॉल में 02 फरवरी 2020 को 73वें ब्रिटिश एकेडमी फिल्म एंड टेलीविजन आर्ट्स अवार्ड्स (बाफ्टा) का आयोजन किया गया. इसमें साल 2019 के सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रीय और विदेशी फिल्मों को सम्मानित किया गया. इसमें सबसे ज्यादा सात अवॉर्ड फिल्म ‘1917’ को मिला है. फिल्म ‘1917’ ब्रिटिश फिल्मकार सैम मैंडेस की वार पर आधारित फिल्म है.

जनवरी में बाफ्टा एवं ‘एकेडमी ऑफ मोशन पिक्चर्स आर्ट्स एंड साइंसेज’ ने नामांकन की घोषणा की थी. ब्रैड पिट ने ‘वन्स अपॉन अ टाइम इन हॉलीवुड’ के लिए 'बेस्ट सपोर्टिंग अभिनेता' का पुरस्कार जीता. वहीं, 'बेस्ट सपोर्टिंग अभिनेत्री' पुरस्कार मैरिज स्टोरी के लिए लॉरा डर्न को मिला.

जोकर फिल्म में बेहतरीन अभिनय के लिए जॉकिन फोनिक्स को बेस्ट अभिनेता के अवॉर्ड से नवाजा गया. वहीं रेनी जेल्वेगर ने ‘जूडी’ फिल्म के लिये बेस्ट अभिनेत्री का अवॉर्ड अपने नाम किया. रेनी जेल्वेगर को इससे पहले 'कोल्ड माउंटेन' हेतु सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री का पुरस्कार जीता था.
बाफ्टा विजेताओं की पूरी सूची
रेनी जेल्वेगर (जूडी)

बेस्ट एक्टर

बेस्ट प्रोडक्शन डिजाइन

बेस्ट कॉस्ट्यूम डिजाइन
बेस्ट डाक्यूमेंट्री

वाड अल-काटेब, एडवर्ड वाट्स (समा)

बेस्ट एनिमेटेड फिल्म

बेस्ट कास्टिंग

शायना मार्कोविट्ज (जोकर)
हान जिन वोन, बोंग जून-हो (पैरासाइट)
ब्रिटिश अकादमी फ़िल्म पुरस्कार ब्रिटिश अकादमी ऑफ फिल्म और टेलीविजन आर्ट्स द्वारा प्रदत्त एक वार्षिक पुरस्कार है. इसे बाफ्टा पुरस्कार भी कहा जाता है. यह अमेरिका के ऑस्कर पुरस्कार का समकक्ष है. यह साल 2008 से लंदन के रॉयल ओपेरा हाउस में आयोजीत होता है.


Rudraksh Tripathi @Rudragofficial

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@Rudragofficial